टू द पॉइंट
वर्तमान में यह परमिट प्रणाली अरुणाचल प्रदेश, मिज़ोरम और नगालैंड पर लागू है। मणिपुर को राजपत्र अधिसूचना के माध्यम से इनर लाइन परमिट (Inner Line Permit- ILP) शासन के तहत लाया गया है और उसी दिन संसद में यह बिल पारित किया गया था।
- OCI के पंजीकरण को रद्द करना: अधिनियम में यह प्रावधान है कि केंद्र सरकार कुछ आधारों पर OCI के पंजीकरण को रद्द कर सकती है। इसमें शामिल हैं: (i) यदि OCI ने धोखाधड़ी द्वारा पंजीकरण कराया हो या (ii) यदि पंजीकरण कराने कि तिथि से पाँच वर्ष की अवधि के भीतर OCI कार्डधारक को दो साल या उससे अधिक समय के लिये कारावास की सज़ा सुनाई गई हो या (iii) यदि ऐसा करना भारत की संप्रभुता और सुरक्षा के हित में आवश्यक हो।
विधेयक पंजीकरण को रद्द करने के लिये एक और आधार जोड़ता है, इस नए आधार के अनुसार, OCI ने केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित अधिनियम या किसी अन्य कानून के प्रावधानों का उल्लंघन किया है तो कार्डधारक को सुनवाई का अवसर दिये बिना OCI रद्द करने के आदेश नहीं दिया जाएगा।
संशोधन अधिनियम को लेकर चिंता
- उत्तर-पूर्व के मुद्दे:
- यह 1985 के असम समझौते का उल्लंघन करता है, जिसमें कहा गया है कि 25 मार्च, 1971 के बाद बांग्लादेश से आए अवैध प्रवासियों को धर्म की परवाह किये बिना देश से बाहर निकाल दिया जाएगा।
- आलोचकों का तर्क है कि नागरिकता संशोधन अधिनियम के आने से राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (National Register of Citizens-NRC) का प्रभाव खत्म हो जाएगा।
- असम में अनुमानित 20 मिलियन अवैध बांग्लादेशी प्रवासी हैं और उनके कारण राज्य के संसाधनों एवं अर्थव्यवस्था पर बहुत अधिक दबाव पड़ने के अलावा राज्य की जनसांख्यिकी में भी भारी बदलाव आया है।
सरकार का रुख
- सरकार ने स्पष्ट किया है कि पाकिस्तान, अफ़गानिस्तान और बांग्लादेश इस्लामिक गणराज्य हैं जहाँ मुसलमान बहुसंख्यक हैं इसलिये उन्हें उत्पीड़ित अल्पसंख्यक नहीं माना जा सकता है।
- सरकार के अनुसार, इस विधेयक का उद्देश्य किसी की नागरिकता लेने के बजाय उन्हें सहायता देना है।
- इस प्रकार सरकार ने असम के लोगों को आश्वासन दिया है कि उनकी भाषायी, सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान संरक्षित रहेगी।
निष्कर्ष
- अधिनियम के प्रावधानों की व्याख्या और इसकी संवैधानिकता का परीक्षण करने के लिये संविधान के संरक्षक होने के नाते सर्वोच्च न्यायालय अब इस बात का भी परीक्षण करता है कि क्या अनुच्छेद 14 का परीक्षण किया गया है या नहीं, अधिनियम में किया गया वर्गीकरण उचित है या नहीं।
- भारतीय नागरिकता के मौलिक कर्त्तव्यों में अपने पड़ोसी देशों में सताए गये लोंगों की सुरक्षा करना शामिल है लेकिन सुरक्षा कार्य संविधान के अनुसार होना चाहिये।
- इसके अलावा पूर्वोत्तर के लोगों को यह समझाने के लिये और अधिक रचनात्मक ढंग से प्रयास किया जाना चाहिए कि इस क्षेत्र के लोगों की भाषायी, सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान का संरक्षण किया जाएगा।